हां… बच्चों को भी इन कंडीशन में भी मिल सकती है पिता की पेंशन! – family pension rules for children daughter parents eligibility rttw


अगर परिवार का कमाने वाला सदस्य सरकारी नौकरी में था या पेंशन का लाभ ले रहा था और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को आर्थिक मदद देने के लिए फैमिली पेंशन की व्यवस्था की गई है. इसका मकसद यह है कि कर्मचारी की मौत के बाद उन पर डिपेंडेंट लोगों को हर महीने कुछ आर्थिक सहायता मिलती रहे और उन्हें रोजमर्रा के खर्चों में परेशानी न हो. फैमिली पेंशन सिर्फ पति या पत्नी तक सीमित नहीं है. कुछ खास परिस्थितियों में बच्चे, माता-पिता और अन्य आश्रित सदस्य भी इसके हकदार हो सकते हैं. आइए जानते हैं कि फैमिली पेंशन क्या होती है, किन लोगों को मिलती है और इसके लिए क्या नियम हैं.

फैमिली पेंशन क्या होती है?
फैमिली पेंशन वह मासिक आर्थिक सहायता है, जो किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशन पाने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके पात्र परिवार के सदस्यों को दी जाती है. इसका उद्देश्य परिवार की आर्थिक मदद करना होता है, ताकि उन्हें रोजमर्रा के खर्चों में परेशानी न हो. यह कर्मचारी की रिटायरमेंट पेंशन से अलग होती है और केवल उसकी मृत्यु के बाद ही मिलती है. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रक्षा सेवाओं और EPFO जैसी अलग-अलग योजनाओं में फैमिली पेंशन के नियम अलग हो सकते हैं.

सबसे पहले किसे मिलती है पेंशन?
किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर सबसे पहले उसकी पत्नी या पति को फैमिली पेंशन का अधिकार मिलता है. आमतौर पर विधवा पत्नी को जीवन भर पेंशन मिलती है. कई सरकारी योजनाओं में दोबारा शादी करने पर भी उनकी पेंशन बंद नहीं होती. हालांकि कुछ योजनाओं में विधुर (पति) के लिए अलग नियम हो सकते हैं.

किन बच्चों को मिलती है फैमिली पेंशन?
पति या पत्नी के बाद बच्चों को फैमिली पेंशन मिल सकती है. बेटा 25 वर्ष की उम्र तक पेंशन पाने का हकदार होता है, यदि वह अविवाहित हो और अपनी कमाई न कर रहा हो और बेटी भी 25 वर्ष की उम्र तक या शादी होने तक, जो पहले हो, पेंशन पा सकती है. इसका उद्देश्य बच्चों को तब तक आर्थिक सहायता देना है, जब तक वे अपने पैरों पर खड़े न हो जाएं.

दिव्यांग बच्चों के लिए खास नियम
यदि बेटा या बेटी शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग है और अपनी आजीविका कमाने में सक्षम नहीं है, तो उसे जीवन भर फैमिली पेंशन मिल सकती है. इसके लिए मान्य मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी होता है.

अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा बेटी को भी मिल सकती है पेंशन
अगर बेटी की उम्र 25 वर्ष से अधिक है लेकिन वह अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा है और उसकी अपनी इनकम बहुत कम है, तो वह भी फैमिली पेंशन पाने की पात्र हो सकती है. इसके लिए उसकी आय सरकार द्वारा तय सीमा से कम होनी चाहिए.

माता-पिता को कब मिलती है पेंशन?
यदि कर्मचारी के पीछे न पति/पत्नी हों और न ही कोई पात्र बच्चा, तो आश्रित माता-पिता फैमिली पेंशन का दावा कर सकते हैं. इसके लिए यह साबित करना होता है कि वे आर्थिक रूप से मृत कर्मचारी पर ही निर्भर थे.

गोद लिए और सौतेले बच्चों के लिए भी नियम
यदि बच्चे को कानूनी रूप से गोद लिया गया था या वह सौतेला बच्चा था और कर्मचारी पर निर्भर था, तो वह भी फैमिली पेंशन का हकदार हो सकता है. इसके लिए गोद लेने या वैध संबंध के दस्तावेज जरूरी होते हैं.

किन लोगों को फैमिली पेंशन नहीं मिलती?
हर परिवार का सदस्य फैमिली पेंशन पाने का हकदार नहीं होता. सामान्य तौर पर ये लोग इसके पात्र नहीं होते-
शादीशुदा बेटी (जब तक विशेष नियम लागू न हों), 25 वर्ष से अधिक उम्र का सक्षम बेटा, भाई-बहन, अन्य रिश्तेदार जो कर्मचारी पर आश्रित नहीं थे. 

फैमिली पेंशन कितनी मिलती है
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में सामान्य तौर पर फैमिली पेंशन अंतिम मूल वेतन (Last Drawn Pay) का 30% होती है.अगर कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये थी, तो सामान्य फैमिली पेंशन करीब 15,000 रुपये प्रति माह हो सकती है. कुछ मामलों में शुरुआती 7 वर्षों तक या कर्मचारी के 67 वर्ष की आयु पूरी होने तक (जो पहले हो), 50% तक बढ़ी हुई फैमिली पेंशन भी मिलती है.

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