जब से जेन जी कॉर्परेट कल्चर का हिस्सा बने हैं, उन्होंने कई पुरानी आदतों को पूरी तरह बदल दिया है. जेन जी वर्क कल्चर का पार्ट बनकर काम तो करना चाहता है, लेकिन अपने कायदों से. 9-5 की शिफ्ट का काम अगर 6 घंटों में खत्म हो जाए, तो एक्सट्रा काम करने के बजाय घर जाना पसंद करता है. ज्यादा सोशलाइज करना भी उसे खास पसंद नहीं. काम के वक्त किसी का बोलना उसे इंटरप्शन लग सकता है, लेकिन अगर बात गाने सुनते हुए काम करने की हो, तो ये जेन जी का फेवरेट वर्क है.
दफ्तर में हेडफोन लगाकर काम करना हमेशा से मैनेजर्स और बॉसेज को ऑफेंसिव लगता रहा है. मानो हेडफोन लगाकर काम करने वाला इम्पलॉई सिर्फ गाने सुन रहा हो और ऑफिस का काम नहीं कर रहा. लेकिन जेन जी भी कहां कम है. उन्होंने हेडफोन लगाकर काम करने को ऑफिस कल्चर का पार्ट बना दिया है. उनके लिए हेडफोन लगाकर गाने सुनते हुए काम करना प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का एक तरीका है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जेन जी वर्क स्पेस में हेडफोन लगाकर काम करने को अपना कम्फर्ट स्पेस मानते हैं?
इसका जवाब है हां. हेडफोन जेन जी के लिए एक साथ फोकस और कंपनी, दोनों का काम कर रहा है. जेन जी काम करते वक्त खुद को रीयल वर्ल्ड से एकदम डिसकनेक्ट कर देना चाहता है. वह काम करते वक्त कंस्नट्रेट करने के लिए दुनिया के शोर से दूरी बनाता है, लेकिन दूसरी तरफ उसी हेडफोन से मिलने वाली आवाज उसे पूरी तरह अकेला भी महसूस नहीं होने देती.
क्योंकि शायद उस हेडफोन में बजते गाने जेन जी को और लाइवली फील करवाते है और ऐसे में आपकी प्रोडक्टिविटी और काम करने का फ्लो बेहतर हो जाता है. शायद यही वजह है कि हेडफोन उसके लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि एक ऐसा पर्सनल स्पेस बन गया है जिसे वह हर जगह अपने साथ लेकर चलता है.
जेन जी का हेडफोन से कनेक्शन सिर्फ ऑफिस डेस्क तक सीमित नहीं है. हेडफोन उसके लिए एक बेस्ट फ्रेंड की तरह है, जिसे वह हर जगह अपने साथ लेकर चलता है. मेट्रो हो, जिम हो, कैफे हो या ऑफिस-हेडफोन कई बार उसका परमानेंट कम्पैनियन बन जाता है. कभी गाने उसका मूड ठीक करते हैं, कभी सफर को आसान बनाते हैं और कभी लोगों के बीच रहते हुए भी उसे अपना स्पेस देते हैं.
जेन जी के लिए हेडफोन शायद कन्स्नट्रेशन करने का भी तरीका है और अकेलेपन से दूरी भी-एक ऐसा कम्पैनियन, जो लोगों से दूर किए बिना उसे अपनी दुनिया में रहने की जगह देता है.
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