‘हॉर्मुज पर हमेशा तनी रहेगी हमारी तलवार…’ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इंटरव्यू में किए कई खुलासे – abbas araghchi interview strait hormuz warning us iran deal details ntc dhrj


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर उनकी तलवार हमेशा तनी रहेगी. इस समुद्री रास्ते पर अब ईरान और ओमान का पूरा नियंत्रण होगा. यहां से गुजरने वाले जहाजों से अब सर्विस फीस वसूली जाएगी. अराघची ने अमेरिका के साथ चल रही सीक्रेट डील का राज भी खोला. उन्होंने बताया कि दो पन्नों के इस शुरुआती समझौते के तहत ईरान का कोई भी पैसा अब फ्रीज नहीं रह सकता. साथ ही उन्होंने अमेरिका को नौसैनिक नाकेबंदी को हर हाल में हटाने की बात कही.

ईरानी सरकारी मीडिया IRIB को दिए इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि ईरान के राजनयिक और सैन्य कमांडर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं. बातचीत की मेज पर बैठा उनका वार्ताकार देश की सेना की ताकत के दम पर ही बात करता है. सुरक्षा के मसले पर उनका कहना था कि ईरान अपनी रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र या किसी भी विदेशी गठबंधन के भरोसे नहीं बैठा है. देश की सुरक्षा सिर्फ गॉड (खुदा), वहां की जनता और अपनी फौज के हौसले पर टिकी है.

दो चरणों में होगी डील, हिजबुल्लाह को नहीं छोड़ेंगे अकेला

इस समझौते की परतों को खोलते हुए अराघची ने बताया कि पूरी डील को दो चरणों में बांटा गया है. पहले चरण में परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई, इसे पूरी तरह दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है. संवर्धित यूरेनियम को लेकर भी ईरान का रुख बिल्कुल साफ है. उनका कहना है कि अगर यूरेनियम की ताकत को कम करने की नौबत आई, तो यह काम ईरान के भीतर ही होगा, किसी दूसरे देश में नहीं.

लेबनान के मोर्चे पर बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि ईरान कभी भी हिजबुल्लाह को अकेला नहीं छोड़ेगा. युद्ध का खात्मा तभी माना जाएगा, जब सभी मोर्चों पर लड़ाई पूरी तरह बंद होगी. इसके साथ ही उन्होंने हॉर्मुज को लेकर चीन और ओमान जैसे दोस्तों के साथ मिलकर ट्रैफिक मैनेज करने की बात कही. अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक यहां से सीधे टैक्स तो नहीं वसूला जा सकता, लेकिन जहाजों को दी जाने वाली सेवाओं के बदले फीस जरूर ली जाएगी.

वादे तोड़ना अमेरिका की फितरत, ईरान ने बंद किए सारे रास्ते

इंटरव्यू के आखिर में अराघची ने अमेरिका की नीयत पर अविश्वास जताते हुए कहा कि वादे तोड़ना अमेरिकी नेताओं के स्वभाव में है. ऐसे में समझौते को जमीन पर लागू करने में कई तरह की अड़चनें आ सकती हैं, जिससे निपटने के लिए ईरान ने धोखेबाजी के सारे रास्ते पहले ही बंद कर दिए हैं. अगर इस मसौदे की शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो फाइनल एग्रीमेंट पर दस्तखत नहीं होंगे.

दो पन्नों के इस शुरुआती समझौते पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) में कुछ लोग समर्थन में हैं, तो कुछ इसका विरोध कर रहे हैं. हालांकि, विदेश मंत्री ने साफ किया कि आखिरी फैसला किसी एक का नहीं बल्कि सबका मिलकर होगा. इसके लिए फिलहाल थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, जैसे ही काउंसिल से हरी झंडी मिलेगी, इस समझौते को रिमोटली साइन कर दिया जाएगा.

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