मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसलों से एक खास रिकॉर्ड बनाया है. नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर में पदभार संभालने के बाद उन्होंने अब तक 9 मामलों में 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. इन मामलों में हत्या, लूट के बाद हत्या और ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड की हत्या जैसे बेहद गंभीर अपराध शामिल हैं.
सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक, अदालत ने इन मामलों को बेहद संगीन मानते हुए ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का माना और दोषियों को मृत्युदंड दिया. जज रवि कुमार दिवाकर का मुजफ्फरनगर में यह रिकॉर्ड अब चर्चा का विषय बना हुआ है.
चलिए आपको तारीख दर तारीख बताते हैं 22 लोगों को फांसी की सजा का ब्योरा-
6 अप्रैल 2026
अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में मुजरिम करार दिए गए सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को सजा-ए-मौत सुनाई गई.
28 अप्रैल 2026
शेखर हत्याकांड में दोषी मुकेश और उसके तीन बेटों प्रदीप, संदीप और सोनू को फांसी की सजा दी गई.
30 मई 2026
राजेश देवी-हिमांशु हत्याकांड में रईस को मौत की सजा सुनाई गई.
20 जून 2026
राजेंद्र सैनी हत्याकांड में रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को फांसी की सजा सुनाई गई.
2 जुलाई 2026
ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड रतिराम की हत्या के मामले में दीपक को मृत्युदंड दिया गया.
6 जुलाई 2026
राजबीर सिंह हत्याकांड में पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को फांसी की सजा सुनाई गई.
17 जुलाई 2026
किसान राजसिंह की लूट के बाद हत्या के मामले में दोषी अजित, सूरज उर्फ काला, अनिल और सुनील को मृत्युदंड दिया गया.
12 अगस्त 2026
सालिम हत्याकांड में दोषी शाहनवाज को फांसी की सजा सुनाई गई.
13 अगस्त 2026
पवन हत्याकांड में राहुल उर्फ बोसी, हरेंद्र कुमार, रामवीर और राजीव उर्फ छोटू को मृत्युदंड सुनाया गया.
इन कुल 9 मामलों में 22 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई. आपको बता दें कि जज रवि कुमार दिवाकर का नाम इससे पहले भी देशभर में चर्चा में आ चुका है. साल 2022 में वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के वीडियोग्राफिक सर्वे का आदेश देने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे.
इसके बाद वह चित्रकूट और बरेली में भी तैनात रहे और बरेली कार्यकाल के दौरान 2014 के ट्रिपल मर्डर और डकैती मामले में चैमार हसन गैंग के 8 सदस्यों को मौत की सजा सुनाई थी. बरेली में सुनाई गई 13 मौत की सजाओं को जोड़ दें तो उनके न्यायिक करियर में अब तक मृत्युदंड पाने वाले दोषियों की संख्या 35 तक पहुंचती है. लगातार मौत की सजाओं के चलते ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ सिद्धांत के तहत मृत्युदंड के इस्तेमाल को लेकर कानूनी और न्यायिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है.
—- समाप्त —-
