102 मीटर का छक्का छोड़िए… इस पारी ने बताया- वैभव सिर्फ छक्के मारने नहीं, मैच बनाने भी आए हैं – vaibhav sooryavanshi 81 runs india vs zimbabwe 3rd t20i batting analysis game awareness cricket iq bmsp


वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 में 81 रन जरूर बनाए, लेकिन इस पारी की सबसे बड़ी कहानी उनके चौके-छक्के नहीं थे. असली कहानी थी एक ऐसे बल्लेबाज की, जो महज 15 साल की उम्र में यह समझने लगा है कि हर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजना ही महान बल्लेबाजी नहीं होती.

हरारे में पहली बार दुनिया ने सिर्फ एक विस्फोटक टैलेंट नहीं, बल्कि एक परिपक्व बल्लेबाज की झलक देखी. सिकंदर रजा को लगा कि उन्होंने वैभव को फंसा लिया है. वैभव क्रीज से बाहर निकले, गेंद बल्ले के बीचों-बीच भी नहीं लगी, लेकिन फिर भी 102 मीटर दूर स्टैंड में जा गिरी.

लोग उस छक्के की दूरी पर हैरान थे. लेकिन उससे भी ज्यादा हैरानी उस आखिरी पल में किए गए एडजस्टमेंट पर होनी चाहिए थी. यह ताकत का नहीं, तकनीक और मैच की समझ का छक्का था.

सिर्फ दो हफ्ते पहले इंग्लैंड के खिलाफ जोफ्रा आर्चर लगातार उनके शरीर पर शॉर्ट गेंदें फेंक रहे थे. तब सवाल उठ रहे थे कि क्या वैभव के पास प्लान-बी है? हरारे ने शायद उसका जवाब दे दिया. 

पहली बार वैभव ने अपनी पारी बनाई

पहले टी20 में उन्होंने 18 गेंदों में अर्धशतक जड़ा और अगली बड़ी हिट के चक्कर में आउट हो गए. दूसरे मैच में भी यही कहानी दोहराई. लेकिन तीसरे मैच में उन्होंने खुद को रोका.

पिच धीमी थी. गेंद बल्ले पर नहीं आ रही थी. सातवें से दसवें ओवर तक भारत एक भी बाउंड्री नहीं लगा पाया. पहले वाला वैभव शायद इसी दौरान बड़ा शॉट खेलकर जोखिम उठा बैठता.

इस बार उन्होंने इंतजार किया. सिंगल लिए. डबल लिए. स्ट्राइक घुमाई. गेंदबाजों को थकाया… और फिर सही समय आने का इंतजार किया. यही वह बदलाव है, जो अच्छे बल्लेबाज और लंबे समय तक राज करने वाले बल्लेबाज के बीच फर्क पैदा करता है. जब गियर बदला, तो गेंदबाजों के पास जवाब नहीं था.

31 गेंद में अर्धशतक पूरा हुआ, लेकिन वैभव ने रफ्तार नहीं बढ़ाई. पहले इंतजार किया, फिर वार किया. एक गेंद पर सीधा करारा ड्राइव, अगली पर शानदार रिवर्स स्वीप. गेंदबाज समझ पाता, उससे पहले मैच का रुख बदल चुका था.

यह कोई पहले से तय शॉट नहीं था. गेंदबाज उन्हें ऑफ साइड में फंसाना चाहता था, लेकिन वैभव ने उसी पल नया रास्ता निकाल लिया. यही क्रिकेटिंग IQ है.

बेबी बॉस ने शतक की परवाह नहीं की

81 रनों पर पहुंच चुके वैभव के लिए शतक सिर्फ कुछ शॉट दूर था. 5 ओवर का खेल बाकी था. लेकिन उन्होंने शतक के बारे में नहीं सोचा, बल्कि टीम के लिए तेजी से रन बनाने की कोशिश जारी रखी. अपनी पसंदीदा रेंज में आई गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए, लेकिन लॉन्ग ऑफ पर कैच दे बैठे. स्कोरबुक में यह सिर्फ 81 रन रहेगा. लेकिन क्रिकेट समझने वाले जानेंगे कि यह 81 रन किसी भी शतक से ज्यादा कीमती थे.

यह पारी इसलिए खास है…

49 गेंद  (8 चौके, 4 छक्के) की इस पारी में वैभव ने सिर्फ 22 बार आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश की. उनका स्ट्राइक रेट 165.30 रहा.

आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने पहले से कम हमला किया. लेकिन यही आंकड़े यह भी बताते हैं कि उन्होंने पहले से कहीं ज्यादा सोचकर बल्लेबाजी की. अब तक दुनिया उनकी बैकलिफ्ट, ताकत और 100 मीटर से लंबे छक्कों की चर्चा करती रही है. हरारे ने पहली बार उनकी क्रिकेटिंग बुद्धिमत्ता दिखाई. 

यह वैभव सूर्यवंशी 2.0 की शुरुआत हो सकती है

आईपीएल ने दुनिया को एक निडर पावर-हिटर दिया था. हरारे ने शायद भारत को भविष्य का मैच बनाने वाला बल्लेबाज़ दिखा दिया.  अगर यही सीख जारी रही, तो आने वाले वर्षों में वैभव सूर्यवंशी सिर्फ सबसे लंबे छक्कों के लिए नहीं, बल्कि सबसे बड़ी पारियां खेलने के लिए याद किए जाएंगे.

102 मीटर का छक्का लोगों को याद रहेगा… लेकिन भारतीय क्रिकेट के लिए असली खुशखबरी यह है कि वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ गेंद नहीं, मैच भी पढ़ने लगे हैं.
 

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