CREST- IDFC फ्रॉड केस में CBI की चार्जशीट, IFoS अफसर समेत 3 लोग बनाए गए आरोपी – cbi chandigarh crest idfc fraud case chargesheet ifos officer navneet srivastava pvzs


चंडीगढ़ के CREST-IDFC फ्रॉड केस में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें इंडियन फॉरेस्ट सर्विस यानी IFoS अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी की डायरेक्टर शामिल हैं. कंपनी की डायरेक्टर नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी हैं. यह मामला चंडीगढ़ में सरकारी फंड की कथित हेराफेरी से जुड़ा है.

CBI के मुताबिक, नवनीत श्रीवास्तव उस समय चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसाइटी (CREST) के CEO के पद पर तैनात थे. आरोप है कि उन्होंने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और CREST के फंड में गड़बड़ी की. जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी कर्मचारी के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अवैध लाभ भी हासिल किया. इस मामले में IDFC फर्स्ट बैंक के खातों में मौजूद रकम कथित तौर पर गलत तरीके से निकाली गई.

जांच में सामने आया कि विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसकी डायरेक्टर को भी इस कथित साजिश में शामिल पाया गया. CBI के अनुसार, कंपनी को ठगी गई रकम में से करीब 95 लाख रुपये मिले थे. बाद में इस रकम का इस्तेमाल अचल संपत्ति यानी अचल संपत्ति खरीदने में किया गया. एजेंसी ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए हैं.

इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी, आपराधिक कदाचार और उकसाने से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं. CBI के मुताबिक, इस CREST मामले में धोखाधड़ी की कुल रकम करीब 75.4 करोड़ रुपये है. नवनीत श्रीवास्तव को CBI पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. इस मामले की जांच पहले केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की एजेंसियां कर रही थीं, जिसे बाद में CBI ने अपने हाथ में लिया.

CREST मामले में नवनीत श्रीवास्तव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ यह चार्जशीट दाखिल की गई है, जबकि इससे पहले CBI इस मामले में 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. एजेंसी अब इस पूरे मामले में पैसों के लेनदेन और फंड ट्रेल की जांच कर रही है. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कथित तौर पर हेराफेरी की गई रकम आखिर किन-किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंची. साथ ही मामले में किसी अन्य आरोपी की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच जारी है.

यह मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 32 में मौजूद IDFC फर्स्ट बैंक की ब्रांच से जुड़े बड़े बैंकिंग फ्रॉड का हिस्सा है. इसी व्यापक मामले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों के करीब 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड की कथित तौर पर हेराफेरी की गई. आरोप है कि फर्जी और अस्तित्व में नहीं होने वाली फिक्स्ड डिपॉज़िट के साथ-साथ फर्जी डेबिट ट्रांज़ैक्शन के जरिए रकम निकाली गई. हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी और अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.

इसी सिलसिले में एक तीसरा मामला भी CBI ने अपने हाथ में लिया है, जो चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़ा है. इस मामले में नगर निगम को करीब 78 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. CBI ने इस केस में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इस तरह CREST, हरियाणा सरकार का फंड और स्मार्ट सिटी/नगर निगम से जुड़े तीनों मामलों में जांच एजेंसी अलग-अलग स्तर पर कथित वित्तीय गड़बड़ियों और फंड ट्रेल की पड़ताल कर रही है.

CBI के अनुसार, तीनों मामलों की जांच अभी जारी है. एजेंसी का फोकस कथित तौर पर हेराफेरी की गई पूरी रकम का ट्रेल पता लगाने और इससे जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने पर है. जांच पूरी होने के साथ इस मामले में और भी तथ्य सामने आने की संभावना है. फिलहाल चार्जशीट में नामजद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संबंधित अदालत की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी.

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