AISA के मार्च से दूरी, कॉकरोच जनता पार्टी का सपोर्ट… किस दिशा में जा रहा रांची का छात्र आंदोलन? – jharkhand ranchi jpsc jssc recruitment student protest cjp support edmm


जुलाई के अंत से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों का आंदोलन अब महत्वपूर्ण मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, OMR शीट विवाद और लेट-लतीफी के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन एक तरफ पारंपरिक राजनीतिक छात्र संगठनों से दूरी बना रहा है, तो दूसरी तरफ देश के नए युवा प्रेशर ग्रुप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन से कदम मिलाता दिख रहा है.

बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में चर्चा में आईं AISA नेता नेहा बोरा ने 7 अगस्त को रांची में ‘विधानसभा मार्च’ का आह्वान किया था. लेकिन जमीन पर डटे ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच’ के छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AISA के इस मार्च से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है. 

छात्रों ने साफ कहा है कि 7 अगस्त के मार्च से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनका अपना स्वतंत्र विधानसभा घेराव 10 अगस्त को होगा.वहीं दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर 36 दिनों का ऐतिहासिक आंदोलन चलाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर चुके हैं.

AISA से क्यों बनाई दूरी? 

इसके पीछे की एक वजह ये है कि रांची के मूल आंदोलनकारी छात्र किसी भी स्थापित वामपंथी या दक्षिणपंथी राजनीतिक छात्र संगठन का ‘टैग’ अपने सिर नहीं लेना चाहते.  JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच’ के छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह से जारी यह आंदोलन किसी बाहरी राजनीतिक दल की बैसाखी पर नहीं टिका है. AISA के 7 अगस्त के आह्वान को छात्रों ने उनका ‘निजी व राजनीतिक कार्यक्रम’ बताया है.

दूसरी बात छात्रों को आशंका है कि यदि जेएनयू या दिल्ली केंद्रित राजनीतिक छात्र संगठन आंदोलन की अगुवाई करेंगे, तो हेमंत सोरेन सरकार इसे ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताकर उनकी मूल मांगों (14वीं JPSC PT रद्द करने और CBI/स्वतंत्र जांच) को खारिज कर देगी.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का एंट्री 

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के साथ आंदोलन कर चर्चित हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने रांची के छात्रों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने रांची में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य से बात कर आंदोलन को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है. दीपके ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वे झारखंड भी जाएंगे.

JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार से सीधी वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी की है, जिसमें 8 छात्र प्रतिनिधि (रवीन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह आदि) शामिल हैं. पत्रकारों और कानूनविद को सिर्फ अभिभावक/गाइड के रूप में जोड़ा गया है, ताकि अभ्यर्थियों की मांगों से कोई समझौता न हो.

JPSC-JSSC विवाद: अभ्यर्थियों की मूल लड़ाई

राजनीतिक खींचतान के बीच परीक्षार्थियों का संघर्ष अपनी मूल मांगों पर ही केंद्रित है. छात्रों की मांग है कि कट-ऑफ गड़बड़ी, OMR शीट विवाद और विवादित ‘TDPL’ एजेंसी की भूमिका के कारण 14वीं प्रारंभिक परीक्षा समेत कई परीक्षाएं रद्द कर दोबारा कराई जाएं. राज्य की CID जांच पर अविश्वास जताते हुए स्वतंत्र CBI जांच या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त जजों के पैनल से जांच कराने की मांग भी शामिल हैऋ

छात्र भविष्य में OMR शीट से छेड़छाड़ रोकने के लिए ‘Not Attempted’ का 5वां ऑप्शन जोड़ने की मांग कर रहे हैं.  साथ ही कहना है कि JSSC की लंबित परीक्षाओं का समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर जारी हो तथा भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए.

कुल म‍िलाकर रांची का छात्र आंदोलन आज पारंपरिक छात्र राजनीति के खांचे से बाहर निकलकर गैर-राजनीतिक युवा प्रेशर ग्रुप्स (CJP) के समर्थन के साथ नए समीकरण बना रहा है. 7 अगस्त के AISA मार्च का बहिष्कार कर 10 अगस्त के अपने स्वतंत्र विधानसभा घेराव पर अड़े छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी लड़ाई किसी संगठन के झंडे के लिए नहीं, बल्कि अपने हक और भविष्य के लिए है.

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