सवा दो साल बाद चुनावी मंच पर आकाश आनंद, क्या पुराना आक्रामक तेवर दिखेगा? – akash anand bsp mayawati up hathras railly 2027 election political challenges ntcpkb


बसपा के खिसकते सियासी जनाधार और एक के बाद एक मिल रही चुनावी शिकस्त को देखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती को अपने भतीजे आकाश आनंद से ‘सियासी चमात्कार’ की उम्मीद है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बीच ही मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया था, लेकिन 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में 2007 जैसे नतीजे को दोहराने के लिए फिर से आकाश आनंद को फिर से यूपी के सियासी रण में उतरा है. 

हाथरस की सादाबाद विधानसभा सीट से आकाश आनंद 2027 के चुनावी अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं. बसपा का विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन सादाबाद के कूपा मार्ग स्थित उत्सव गार्डन में रखा गया है. आकाश आनंद सादाबाद विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रभारी डॉ अविन शर्मा के नाम का ऐलान करेंगे, जो 2027 के चुनाव में प्रत्याशी होंगे. 

यूपी में बसपा के बिखरते वोटबैंक, पार्टी छोड़ते नेता, हताश संगठन समेत तमाम चुनौतियों के बीच आकाश आनंद यूपी की सियासत में सक्रिय होने जा रहे हैं. अब देखना होगा कि बसपा के बिखरे कुनबे को इकट्ठा करने और नगीना से सांसद बने चंद्रशेखर आजाद की रणनीति से निपटने के लिए आकाश आनंद कैसे कदम उठाएंगे, जो उन्हें यूपी की राजनीति में स्थापित कर सके? 

हाथरस से आकाश भरेंगे चुनावी हुंकार
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद करीब सवा दो साल के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी रण में उतरने जा रहे हैं. सोमवार को हाथरस जिले की सादाबाद सीट पर बसपा के प्रभारी अविन शर्मा की होने वाली घोषणा के लिए रखी जनसभा को आकाश आनंद संबोधित करेंगे. इस तरह बसपा के चुनाव अभियान की वो औपचारिक शुरुआत करेंगे.

यूपी में बसपा के इस सम्मेलन की जिम्मेदारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी बाबू मुनकाद अली के कंधों पर है. जनसभा को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है. माना जा रहा है कि 20 हजार बसपा के कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचेगे. इस सम्मेलन को उत्तर प्रदेश में बसपा के आगामी चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है. 

आकाश क्या 2024 वाले तेवर में दिखेंगे?
आकाश आनंद अब दोबारा से यूपी चुनाव में प्रचार की कमान संभाल रहे, लेकिन सवाल यह है कि 2024 के तरह ही आक्रामक तेवर अपनाएंगे या फिर अलग अंदाज में नजर आएंगे. 2024 के लोकसभा चुनाव में आकाश आनंद ने अपनी शानदार भाषण शैली से देशभर का ध्यान खींच लिया था. बीएसपी समर्थकों में एक गजब का उत्साह दिखने लगा था. 

आकाश आनंद आक्रामक अंदाज में बीजेपी, सपा और कांग्रेस तीनों पर हमलावर थे. वो सीधे-सीधे योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी के अगुवाई वाली सरकार और बीजेपी को निशाने पर ले रहे थे. मोदी सरकार द्वारा मुफ्त दिए जाने वाले पांच किलों राशन पर सवाल उठाया था. बीजेपी पर निशाना साधते हुए आकाश ने कहा था, ‘जो सरकार अपनी जनता को डराती है, युवाओं को बेरोजगार रखती है और पेपर लीक करवाती है, ‘आतंकवादी सरकार’ जैसी है.’ 

आकाश आनंद के आक्रामक तेवर

आकाश यहीं नहीं रुके, मंच से लोगों से कहा था कि ऐसी सरकार और उसके प्रतिनिधियों को ‘जूते मारकर’ सत्ता से बाहर कर देना चाहिए. आकाश आनंद के इसी बयान के बाद ही मायावती ने उन पर एक्शन लिया था. आकाश की तमाम प्रस्तावित रैलियां रद्द कर दी गई थी और यूपी में उनकी कोई भी रैली नहीं हुई थी.बसपा में दोबारा एंट्री 9 अक्तूबर 2025 को कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती के साथ लखनऊ में आकाश ने जनसभा को संबोधित किए थे, लेकिन बहुत ही सधे हुए अंदाज में नजर आए थे. 

उत्तर प्रदेश में आकाश आनंद की वापसी को सूबे की राजनीति में उनकी दूसरी पारी के तौर पर देखा जा रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव की तपिश बढ़ने के साथ यूपी में फिर से जनसभा शुरू कर रहे हैं. हाथरस के सहाबाज बाद आकाश आनंद ग्रेटर नोएडा के जेवर में 25 अगस्त को अपनी दूसरी रैली करेंगे. जेवर में भी बीएसपी के उम्मीदवार का ऐलान करेंगे. जेवर सीट पर सतवीर नागर को प्रभारी बनाए जाने का प्लान है, जो बाद में पार्टी के प्रत्याशी होंगे. अब नजर है कि हाथरस में आकाश किस तेवर में दिखेंगे, क्या अपने आक्रामक अंदाज में ही रैली को संबोधित करेंगे या फिर सधे हुए शब्दों में अपनी बात रखेंगे? 

आकाश के सामने चुनौतियों का अंबार
बसपा के लिए 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव करो या मरो की हालत में है. 2012 से बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता दूर है और 2027 का चुनाव मायावती के लिए काफी अहम माना जा रहा है.2027 का चुनाव बसपा के सियासी वजूद को बचाए रखने का है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी के केवल एक विधायक जीते तो 2024 लोकसभा चुनाव में खाता तक नहीं खुला. ऐसे में बसपा पर सवाल सिर्फ सत्ता से दूर होने का ही नहीं, बल्कि अस्तित्व का भी खड़ा हो गया है, जिसके चलते आकाश आनंद के सामने चुनौतियां का अंबार है. 

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेता चंद्रशेखर आज़ाद नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और वो अब दलित नेता के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में चंद्रशेखर की सियासत को काउंटर करने के लिए ही मायावती ने फिर से आकाश आनंद को आगे बढ़ाने का ही फैसला नहीं किया बल्कि पहले से ज्यादा पावरफुल बना दिया है.

आकाश आनंद की दलित युवाओं के बीच अच्छी-खासी लोकप्रियता है, जिसे अब वो पूरी तरह से पार्टी के साथ जोड़ने का काम करेंगे. इससे जाटवों और अन्य दलित मतदाताओं के फिर से भरोसा पैदा करने और लोकसभा चुनाव में हार के बाद हतोत्साहित हमारे कैडर में फिर से ऊर्जा भरने में करने की चुनौती है. 

बीएसपी पर बीजेपी की बी-टीम का नैरेटिव चस्पा हुआ है. एक जमाने में मुसलमान भी बसपा का कोर वोट बैंक हुआ करता था, लेकिन अब बीजेपी के खिलाफ बसपा को कमजोर देख वे सपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुके हैं. बसपा के लिए राहत की एकमात्र बात ये है कि जाटव समाज का वोटर काफी हद तक अब भी मायावती के साथ है, लेकिन केवल उसके भरोसे कोई भी चुनाव मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी है. बसपा के पास अब कोई लोकसभा सांसद नहीं है और जिससे बसपा और कमज़ोर होगी. 

मायावती के प्रचार की शैली से अलग, जहां वह मुख्य रूप से एसपी और कांग्रेस पर निशाना साधती थीं तो आकाश आनंद 2024 में शिक्षा, गरीबी, अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे थे. सपा के पीडीए पर आकाश आनंद ने सवाल उठाकर अपने तेवर दिखा दिए हैं. 

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