झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली का मामला अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है. परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है.
प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), झारखंड सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सुमित समेत अन्य पक्षकारों से जवाब दाखिल करने को कहा है.
याचिका में क्या की गई है मांग?
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई है. याचिका में 19 अप्रैल 2025 को आयोजित हुई JPSC प्रारंभिक परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं.
- 19 अप्रैल को आयोजित JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराई जाए.
- परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधली की किसी भी राज्य एजेंसी के बजाय स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से CBI से जांच कराई जाए.
- मामले की गहराई से जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक पारदर्शी और स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाए.
- अभ्यर्थियों की OMR शीट की स्कैनिंग, कोडिंग, चेकिंग और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का किसी स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराया जाए.
- परीक्षा और इसके परिणाम से जुड़े सभी प्रकार के दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए ताकि जांच में किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके.
लाखों अभ्यर्थियों की नजरें फैसले पर
गौरतलब है कि JPSC की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के आयोजन के बाद से ही अभ्यर्थियों द्वारा बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे. परीक्षा को रद्द करने और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए जाने को लेकर छात्र लगातार आंदोलनरत थे. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर लाखों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं.
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