राहुल गांधी रायबरेली में लौटा पाएंगे कांग्रेस के ‘सुनहरे दिन’, 0 का संकट कैसे होगा खत्म? – rahul gandhi raebareli congress sonia gandhi 2027 elections sp alliance akhilesh ntcpkb


लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे हैं. उन्होंने बुधवार को रायबरेली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ सिर्फ मुलाकात ही नहीं की, बल्कि जिले की सियासी नब्ज को टटोलने का काम भी किया. राहुल गांधी भले ही दिशा (DISHA) की बैठक में शामिल होने पहुंचे हों, लेकिन उनके दौरे को यूपी के विधानसभा चुनाव 2027 से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लगभग आधा वक्त बाकी है, लेकिन सियासी एक्सरसाइज अभी से शुरू हो चुकी है. रायबरेली सिर्फ उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा सीट नहीं, बल्कि गांधी परिवार और कांग्रेस की सियासत का वह मजबूत किला है, जिसने सत्ता के सबसे बुरे दौर में भी पार्टी का परचम लहराए रखा.

2024 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी रायबरेली सीट से चुनावी मैदान में उतरे और करीब चार लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की. अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 2027 के चुनाव में क्या रायबरेली में ‘सोनिया गांधी वाला दौर’ वापस लौट पाएगा, क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रायबरेली में खाता भी नहीं खुल सका था.

राहुल गांधी रायबरेली में व्यापारियों से मिले

राहुल गांधी मंगलवार को रायबरेली में विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधिमंडलों और व्यापारियों से मिले. रायबरेली के प्रभु टाउन में सर्राफा व्यापारी फाना त्रिवेदी के आवास पर राहुल गांधी ने व्यापारियों से मुलाकात की और उनके कारोबार के बारे में जाना. इस दौरान व्यापारियों ने सोना-चांदी के कारोबार में आई गिरावट, महंगाई और बाजार में घटती क्रयशक्ति का मुद्दा उठाया. समस्याएं सुनने के साथ ही राहुल ने कांग्रेस की ओर से उनकी आवाज सड़क से संसद तक उठाने का भरोसा दिया.

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राहुल ने कहा कि लंबे समय से बीजेपी का समर्थन करने वाला व्यापारी वर्ग आज परेशान है और एक तरह से बीजेपी का साथ देने की सजा भुगत रहा है. भुएमऊ गेस्ट हाउस में राहुल गांधी केमिस्ट प्रतिनिधिमंडल से मिले. दवा कारोबारियों ने राहुल गांधी से ऑनलाइन माध्यम से बिना चिकित्सकीय पर्चे के हो रही दवा बिक्री और इससे पारंपरिक दवा कारोबार पर पड़ रहे असर की शिकायत की. इसके बाद बुधवार को राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.

रायबरेली के दुर्ग को कितना दुरुस्त कर पाएंगे

रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद से ही राहुल गांधी लगातार अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. वह अमेठी जैसी गलती रायबरेली क्षेत्र में नहीं दोहराना चाहते हैं. रायबरेली को वह अपने किसी मैनेजर के भरोसे छोड़ने के बजाय खुद क्षेत्र का दौरा करके अपनी उपस्थिति बनाए रख रहे हैं. इसीलिए वह हर दो से तीन महीने में रायबरेली का दौरा कर रहे हैं.

राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग लोगों से मिलकर संवाद कर रहे हैं. पिछले दौरे पर उन्होंने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण कर दलित समुदाय को साधने की कवायद की थी, तो इस बार व्यापारियों से मुलाकात कर उनकी नब्ज समझने और बीजेपी के कोर वोटबैंक को अपने पक्ष में करने का दांव चला, लेकिन सवाल यही है कि क्या राहुल खुद की जीत की तरह कांग्रेस को रायबरेली की विधानसभा सीटों पर जिता पाएंगे?

रायबरेली में ‘सोनिया वाला दौर’ वापस लौटेगा?

रायबरेली जिले में कुल छह विधानसभा सीटें (रायबरेली सदर, हरचंदपुर, बछरावां, सरेनी, ऊंचाहार और सलोन) आती हैं, जिनमें से 5 सीटें (सलोन को छोड़कर) रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत हैं. वर्तमान में इनमें से एक भी सीट पर कांग्रेस का विधायक नहीं है. 

सोनिया गांधी 2004 में जब रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने आई थीं, तो उस समय पार्टी के पास केवल एक विधायक अखिलेश सिंह थे. सोनिया के रायबरेली से सांसद बनने के बाद जब 2007 में विधानसभा चुनाव हुए, तो कांग्रेस के टिकट पर पांच विधायक चुने गए थे.

कांग्रेस के टिकट पर 2007 में बछरावां से राजा राम त्यागी, सलोन से शिव बालक पासी, सरेनी से अशोक कुमार सिंह, ऊंचाहार से अजय पाल सिंह और हरचंद्रपुर से शिवगणेश लोधी विधायक बने थे. वहीं रायबरेली सदर सीट से अखिलेश सिंह निर्दलीय विधायक बने थे, उस वक्त सपा, बसपा और बीजेपी का खाता तक नहीं खुला था। इसके बाद 2012 में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी, लेकिन 2017 में कांग्रेस के टिकट पर दो विधायक चुने गए.

रायबरेली से अदिति सिंह और हरचंद्रपुर से राकेश सिंह कांग्रेस से विधायक बने थे, लेकिन बाद में दोनों ने ही बीजेपी का दामन थाम लिया. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. बछरावां सीट पर राहुल गांधी के करीबी सुशील पासी इकलौते उम्मीदवार थे, जिनकी जमानत बच पाई थी.

रायबरेली से राहुल गांधी सांसद हैं और अब उनके सामने 2027 का विधानसभा चुनाव है. रायबरेली से भले ही कांग्रेस के राहुल गांधी सांसद हों, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों में सपा और बीजेपी का कब्जा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी दो सीटें (सलोन और रायबरेली सदर) जीती थी और बाकी चार सीटों (हरचंदपुर, बछरावां, सरेनी, ऊंचाहार) पर सपा को जीत मिली थी. हालांकि, ऊंचाहार से सपा विधायक मनोज पांडेय अब बीजेपी का दामन थाम चुके हैं.

राहुल के सांसद बनने के बाद जागी उम्मीद

2022 में कांग्रेस रायबरेली जिले की एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत सकी थी. यहां तक कि पार्टी की पारंपरिक सीट मानी जाने वाली रायबरेली सदर सीट पर भाजपा की अदिति सिंह ने कब्जा जमाया था. राहुल गांधी की प्रचंड जीत से कांग्रेस में एक नई उम्मीद की किरण जागी है. 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को रायबरेली लोकसभा की सभी 5 विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी बढ़त मिली थी.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि राहुल गांधी की जीत ने निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह से बढ़ा दिया है. सांसद बनने के बाद से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली के विकास, स्थानीय मुद्दों और सांगठनिक मजबूती पर सीधा ध्यान दे रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन किया था, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन बरकरार रहता है, तो सीट शेयरिंग का मामला फंस सकता है.

रायबरेली में सपा क्या कांग्रेस के लिए अपनी जीती हुई सीटें छोड़ेगी, यह बड़ा सवाल है. 2017 में जब सपा और कांग्रेस का गठबंधन था, तब रायबरेली की कुछ सीटों पर दोनों दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ भी देखने को मिली थी. रायबरेली की अधिकांश सीटों पर फिलहाल सपा के विधायक चुनकर आए थे. ऐसे में 2027 में गठबंधन होने पर कांग्रेस को कितनी और कौन-सी सीटें मिलेंगी, यह एक पहेली होगी. इसके अलावा भाजपा का केंद्रीय और राज्य नेतृत्व रायबरेली को साधने के लिए लगातार विकास योजनाओं और सामाजिक समीकरणों पर जोर दे रहा है.

2027 में क्या खुलेगा कांग्रेस का खाता?

2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि रायबरेली में अपनी राजनीतिक विरासत और वजूद को नए सिरे से स्थापित करने की परीक्षा होगी. यदि राहुल गांधी की लोकसभा जीत की लहर और गठबंधन का तालमेल जमीनी कार्यकर्ताओं के स्तर तक सही ढंग से काम कर गया, तो न केवल कांग्रेस का खाता खुलेगा, बल्कि जिले में ‘सोनिया एरा’ जैसी मजबूत पकड़ की वापसी की राह भी आसान हो सकती है.

हालांकि, इसके लिए कांग्रेस को बयानबाजी से निकलकर बूथ स्तर पर पसीना बहाना होगा. रायबरेली से सांसद चुने जाने के बाद राहुल गांधी यूपी पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से सूबे में अपनी खोई जमीन तलाश रही है और 2024 के नतीजों ने 2027 के लिए उम्मीद की किरण जगा दी है. ‘मिशन-2027’ को लेकर कांग्रेस नेतृत्व सतर्क है। अब देखना यह है कि राहुल गांधी अपने घर में कांग्रेस को कितनी सीटें दिला पाते हैं.

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