छात्र-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी. हाईकोर्ट ने आकृति की हिरासत को रद्द करने के साथ-साथ उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया था. उत्तर प्रदेश सरकार अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करेगी.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को सरकार के इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. इसके बाद यूपी सरकार की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ औपचारिक अपील दाखिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है.
हाईकोर्ट ने NSA की हिरासत की थी रद्द
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर लगाई गई NSA रद्द कर दी थी. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि हिरासत का आधार राज्य की ओर से तैयार की गई एक मनगढ़ंत कहानी पर आधारित था.
अदालत ने आकृति को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी आवश्यक न हो. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उन्हें पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया. सामने आई जानकारी के मुताबिक, अदालत ने इस राशि की वसूली गौतमबुद्ध नगर जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से किए जाने की बात भी कही थी.
अप्रैल में मजदूर आंदोलन के बाद हुई थी गिरफ्तारी
बता दें कि यह पूरा मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़ा है. नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिकों ने प्रदर्शन किया था. पुलिस का आरोप है कि 13 अप्रैल को चल रहे श्रमिक आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी ने मजदूरों को भड़काने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति हिंसक हो गई.
प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं व सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई. इसके बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था संभालने के लिए कार्रवाई की. पुलिस ने आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच आगे बढ़ाई.
आकृति के खिलाफ कुल 11 एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी. उनकी गिरफ्तारी अप्रैल में हुई थी, जबकि करीब एक महीने बाद उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत निरुद्धि की कार्रवाई की गई.
हाईकोर्ट में सबूतों पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से पेश किए गए आरोपों और सबूतों की पड़ताल की. अदालत ने माना कि आकृति के खिलाफ NSA के तहत हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था. अदालत ने राज्य की ओर से पेश मामले की कहानी को गढ़ी हुई बताते हुए निरुद्धि आदेश को रद्द कर दिया.
आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की छात्रा हैं और उनकी पारिवारिक जड़ें पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से जुड़ी बताई जाती हैं. वह छात्र और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं.
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