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जब बेल्जियम से यूपी पहुंचा 308 पहियों वाला ‘महाबली’ ट्रक, रुकावट बना ब्रिज तो ऐसे पड़ा उठाना! देखने उमड़ी भीड़ – Mahabali truck with 308 wheels arrives in UP from Belgium bridge lifted by crane know details lclam


यूपी के चंदौली स्थित नेशनल हाईवे 19 पर उड़ीसा से लखीमपुर जा रहा 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया. बेल्जियम से समुद्री मार्ग द्वारा उड़ीसा मंगाई गई यह मशीन लखीमपुर खीरी के कुंभी में बायोप्लास्टिक निर्माण प्लांट में लगाई जाएगी. झारखंड और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुए इस बेहद ऊंचे ट्रक को देखने के लिए हाईवे पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई. विशालकाय ट्रक की आवाजाही सुरक्षित रखने, ट्रैफिक संभालने और रास्ते में आने वाले फुट ओवर ब्रिज को क्रेन से लिफ्ट कर रास्ता साफ करने के लिए पुलिस और विशेषज्ञ तैनात रहे.

308 पहियों का ट्रक और बायोप्लास्टिक मशीन

308 पहियों वाले इस विशालकाय ट्रक पर रखी मशीन बेल्जियम से मंगाई गई है. यह समुद्री मार्ग से उड़ीसा बंदरगाह पहुंची और फिर सड़क मार्ग से झारखंड, बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के लिए रवाना हुई. लखीमपुर के कुंभी में बायोप्लास्टिक बनाने का प्लांट लगाया जा रहा है, जहां इस विशाल मशीन का इस्तेमाल होगा.

फुट ओवर ब्रिज को खोलकर ऊंचा किया गया ताकि ट्रक निकल पाए

हाईवे पर कौतूहल और भीड़ का माहौल

जैसे ही यह ट्रक चंदौली पहुंचा, इसे देखने के लिए हाईवे पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. सोशल मीडिया पर उड़ीसा से ही वायरल हो रहे वीडियो को देखकर स्थानीय लोग इसे खुद देखने पहुंचे. भीड़ को नियंत्रित करने और ट्रक को सकुशल आगे बढ़ाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के डिप्टी एसपी कृष्ण मुरारी शर्मा की अगुआई में पुलिसकर्मी तैनात रहे.

रास्ते के अवरोध हटाने के लिए क्रेन का सहारा

ट्रक की ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि रास्ते में जगह-जगह लगे फुट ओवर ब्रिज और होर्डिंग्स इसमें बाधा बन रहे हैं. होर्डिंग्स को उठाने के लिए हाइड्रा मशीन और फुट ओवर ब्रिज को ऊंचा करने के लिए दो बड़ी क्रेनों की मदद ली गई. फुट ओवर ब्रिज के दोनों हिस्सों को खोलकर क्रेन से लिफ्ट किया गया ताकि ट्रक आसानी से नीचे से निकल सके.

आगे के रास्ते के लिए भी विशेष तैयारी

उड़ीसा से लखीमपुर तक के रास्ते में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे अवरोध थे जिन्हें हटाकर ट्रक को आगे बढ़ाया गया. क्रेन ऑपरेटर के अनुसार, लखीमपुर तक के आगे के सफर में भी आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे अवरोध मौजूद हैं, जिन्हें लिफ्ट करने और हटाने का जिम्मा उनकी कंपनी को सौंपा गया है.

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