केंद्र की डेमोग्राफी कमीशन ने मजहब के आधार पर मांगी प्रॉपर्टी की डिटेल, ओवैसी बोले- मुस्लिमों का हक छीनेगी सरकार – demography commission modi govt muslims data religion property ntcppl


कांग्रेस और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की अगुवाई वाली डेमोग्राफी कमीशन ने राज्यों से जन्म और प्रॉपर्टी के लेन-देन से जुड़े धर्म-आधारित डेटा की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि इस कमेटी का एजेंडा “साफ तौर पर खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण” है. वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि अमित शाह का ‘डेमोग्राफी कमीशन’ अब राज्यों से आंकड़े मांग रहा है कि किस मज़हब के लोगों ने कितनी गाड़ियां ख़रीदीं, किसके पास कितनी जमीन है. 

कांग्रेस नेता और पार्टी के  कम्युनिकेशन इंचार्ज और महासचिव जयराम रमेश ने ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट शेयर की है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डेमोग्राफिक बदलावों पर बनी हाई-लेवल कमेटी ने पिछले 15 सालों के जन्म और गाड़ी रजिस्ट्रेशन, स्कूल में दाखिले और प्रॉपर्टी के लेन-देन से जुड़े धर्म-आधारित डेटा के साथ-साथ धार्मिक ढांचों की जिलेवार जानकारी और आधार, वोटर ID और राशन कार्ड रजिस्ट्रेशन में असामान्य बढ़ोतरी का ब्योरा भी मांगा है.

कांग्रेस का कहना है कि इस कमेटी का एजेंडा “साफ़ तौर पर खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण” है. 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमीशन ने अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच धर्म परिवर्तन पर खुफिया जानकारी और आयोग की रिपोर्ट, साथ ही चालू डिटेंशन सेंटरों की जानकारी और अन्य विवरण भी मांगे हैं.

डेमोग्राफी कमीशन क्या है?

बता दें कि High-Level Committee on Demographic Changes (HLCDC) यानी जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्चस्तरीय समिति का गठन केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को किया. इसे बोल-चाल की भाषा में डेमोग्राफी कमीशन भी कहा जाता है.   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में ‘High-powered Demography Mission’ की घोषणा की थी. समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं. इसमें जनगणना आयुक्त के अलावा दुर्गा शंकर मिश्रा, बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि सदस्य हैं. 

समिति का मुख्य काम अवैध आप्रवास और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करना है. यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों में आबादी के बदलाव के पैटर्न, उनके कारणों और असर का विश्लेषण करेगी. साथ ही अवैध प्रवासियों की पहचान, सीमा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय को लेकर नीतिगत, कानूनी और प्रशासनिक सुझाव देगी. समिति को एक साल में रिपोर्ट देनी है. 

कांग्रेस का हमला

जयराम रमेश ने कहा कि इस पैनल का एजेंडा “साफ़ तौर पर खतरनाक” है और इसमें पहले से बनी हुई पूर्वाग्रह वाली सोच साफ़ दिखती है.

रमेश ने आगे कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि इसकी रिपोर्ट पहले ही तैयार हो चुकी है.”

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य सरकारें जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने वाली हाई-लेवल कमेटी के ज़्यादातर सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, क्योंकि सरकारी विभाग आमतौर पर पैनल द्वारा मांगी गई धर्म-आधारित जानकारी का ज़्यादातर रिकॉर्ड नहीं रखते हैं.  

…तो मुंह मोड़ लेती थी सरकार

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब हम मोदी सरकार से मुतालबा करते थे कि वह मुसलमानों की तालीमी, समाजी और मआशी हालत पर आंकड़े जुटाए तो सरकार झट से अपना मुंह फेर लेती थी. उन्होंने कहा कि अमित शाह का “डेमोग्राफी कमीशन” अब राज्यों से आंकड़े मांग रहा है कि किस मज़हब के लोगों ने कितनी गाड़ियां ख़रीदीं, किसके पास कितनी ज़मीन है वगैरह.

इस कमीशन का एजेंडा यह नहीं है कि आंकड़ों की बुनियाद पर बेहतर नीतियां बनाई जाएं बल्कि आंकड़ों को इस तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया जाए कि मुसलमानों को निशाना बनाया जा सके और उनके बचे-खुचे हक भी उनसे छीन लिए जाएं.

इस कमेटी ने 1 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह को बताया था कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जानकारी जुटाने के लिए प्रश्नावली तैयार कर ली गई है इसके बाद ग्राउंड लेवल अध्ययन के लिए दौरे किए जाएंगे.

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