ईरान से लड़ते हुए US जवान की मौत, पेंटागन का मुआवजा देने में आनाकानी- कहा ये युद्ध है ही नहीं – american airforce jawan died in iran war no payout pentagon ntcppl


अमेरिका एक ऐसी लड़ाई लड़ रहा है जिसे व्हाइट हाउस ‘युद्ध’ नहीं कहना चाहता. ईरान के साथ लड़ाई में मारे गए अमेरिकी सैनिक के परिवार के लिए यह फर्क सिर्फ़ शब्दों का मामला नहीं रह गया है. 

33 साल के मेजर एलेक्स क्लिनर 12 मार्च को एक KC-135 रीफ़्यूलिंग एयरक्राफ़्ट में सवार थे. ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों में मदद करते समय ये विमान पश्चिमी इराक में क्रैश हो गया और उनकी मौत हो गई. महीनों बाद उनकी पत्नी लिब्बी क्लिनर ने बताया कि उन्हें शुरू में कहा गया था कि कांग्रेस की तरफ से युद्ध की औपचारिक घोषणा न होने से उन्हें मिलने वाले फायदों पर असर पड़ सकता है. 

‘युद्ध’ शब्द क्यों मायने रखता है?

क्लिन्नर ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए यह मुद्दा सबके सामने उठाया, जिस पर जल्द ही पूरे देश का ध्यान गया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से निराशा हुई कि उनके पति की जान अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद करते हुए गई, फिर भी उन्हें बताया गया कि युद्ध की औपचारिक घोषणा न होने से उनके परिवार को मिलने वाले लाभ पर असर पड़ सकता है.

क्लिन्नर ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया, “मेरे पति की जान इसलिए गई क्योंकि हम युद्ध में हैं, और फिर मुझे बताया गया कि चूंकि तकनीकी रूप से यह युद्ध नहीं है, इसलिए हमें कुछ चीज़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है.” “असल बात तो उसूलों की है.”

बाद में अमेरिकी एयर फोर्स ने क्लिनर से संपर्क किया और उनके पति की आखिरी सैलरी को रिव्यू किया. अधिकारियों ने माना कि उन्हें शुरू में गलत जानकारी दी गई थी।

एयर फोर्स ने साफ़ किया कि क्लिनर की आखिरी सैलरी में लड़ाई से जुड़े जोखिम का भत्ता और टैक्स फ़ायदे शामिल थे. जिस पेमेंट को आम तौर पर “कॉम्बैट पे” कहा जाता है, वह 225 डॉलर प्रति महीना है और इसके लिए कांग्रेस से औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा करवाने की ज़रूरत नहीं होती.  इसके बजाय इसका फायदा उन इलाकों में ड्यूटी करने वाले सैनिकों को मिलता है जहां सैनिकों को शारीरिक चोट या दुश्मन की गोलीबारी का गंभीर खतरा होता है. 

अधिकारियों ने बताया कि समस्या यह थी कि पेमेंट तो शामिल किया गया था, लेकिन उनके पति की आखिरी पे-चेक में उसका ब्योरा गलत तरीके से दिया गया था.

इस विवाद से उस उलझन का पता चलता है कि अमेरिकी सरकार ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को किस तरह बता रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार इस लड़ाई को ‘युद्ध’ कहा है, लेकिन उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है.

गुरुवार को व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में क्लिनर के मामले के बारे में पूछे जाने पर वेंस ने कहा, “हम जितना हो सके उतनी मदद करना चाहते हैं और यह पक्का करना चाहते हैं कि उन्हें वह सब कुछ मिले जिसके वे हकदार हैं.”

“उनके लिए मेरा संदेश यह होगा कि ‘हम आपसे प्यार करते हैं, हम आपके त्याग के लिए आभारी हैं और आपको जो कुछ भी मिलना चाहिए, उसे दिलाने के अपने वादे को हम बहुत गंभीरता से लेते हैं.”

वेंस ने अलग से कहा कि “वहां कोई फायरिंग” नहीं हो रही थी और तर्क दिया कि मौजूदा अमेरिकी अभियानों के लिए ‘युद्ध’ शब्द सही नहीं है.

अगले दिन ट्रंप ने भी इस बात का समर्थन किया और इन हमलों को “बीच-बीच में होने वाली कार्रवाई” बताया. 

उन्होंने कहा, “बहुत से लोग इसे युद्ध नहीं कहते. मैं इसे सैन्य संघर्ष कहता हूं, क्योंकि हमारे लिए यह बहुत छोटी बात है.”

हताहत हुए लोगों को कैसे क्लासिफ़ाई कर रहा है अमेरिका

प्रशासन की शब्दावली का असर इस बात पर भी पड़ा है कि हताहतों का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है. जुलाई के आखिर में पेंटागन ने ईरान के साथ फिर से शुरू हुई लड़ाई में मारे गए या घायल हुए अमेरिकी सैनिकों के लिए एक अलग कैटेगरी बनाई. अधिकारियों ने कहा कि यह बदलाव ज़रूरी था क्योंकि पिछला कॉम्बैट ऑपरेशन “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” खत्म हो चुका था.

7 जुलाई से मिडिल ईस्ट में हताहत हुए अमेरिकी सैनिकों का रिकॉर्ड “ओवरसीज़ ऑपरेशन्स” की बड़ी कैटेगरी के तहत रखा जा रहा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सैनिकों के परिवारों ने पेंटागन पर कुछ चोटों की गंभीरता को कम करके दिखाने का आरोप भी लगाया है और कहा है कि घायल सैनिकों का इलाज हमेशा कॉम्बैट में घायल हुए सैनिकों की तरह नहीं किया जाता है. सेना ने इन दावों को खारिज किया है.

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