नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी मदद को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. नेपाल ने कहा है कि उसने किसी भी मित्र देश या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद से इनकार नहीं किया है.
सरकार ने सिर्फ शुरुआती दौर में अपने सुरक्षा बलों को ज्यादा से ज्यादा तैनात करने को प्राथमिकता दी है.
नेपाल का कहना है कि उसके सुरक्षा बल स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और मुश्किल पहाड़ी इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं. दरअसल, नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. रसुवा और मध्य नेपाल के दूसरे हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.
नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा में अब तक कम से कम 587 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 1900 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ में घरों के साथ सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
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नेपाल ने कहा-विदेशी मदद से इनकार नहीं किया
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शुक्रवार को सरकार का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मदद को खारिज नहीं किया गया है. बचाव अभियान की रणनीति नेपाल की अपनी क्षमता, तत्काल जरूरत और देश की खास भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय की गई है.
उन्होंने कहा कि नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के जवान स्थानीय हालात से अच्छी तरह परिचित हैं. उन्हें यहां के कठिन पहाड़ी इलाकों और मौसम की जानकारी है. ऐसे में शुरुआती दौर में इन्हीं बलों की ज्यादा तैनाती को प्राथमिकता दी गई.
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अनजान इलाकों में विदेशी बचाव दलों को भेजने से तालमेल में मुश्किल आ सकती है. तकनीकी स्तर पर भी कुछ परेशानियां पैदा हो सकती हैं. इससे अभियान के दौरान नए जोखिम खड़े होने की आशंका रहती है. इसलिए नेपाल ने अपनी उपलब्ध क्षमता के आधार पर शुरुआती बचाव अभियान चलाया.
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जरूरत पड़ी तो विदेशी टीमों की मदद लेगा नेपाल
नेपाल सरकार ने साफ किया है कि मुश्किल हालात में वह अंतरराष्ट्रीय मदद लेने के लिए तैयार है. खासकर ऐसे मामलों में जहां विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत हो, वहां विदेशी टीमों की मदद ली जा सकती है.
इसी कड़ी में नेपाल ने भारत और चीन से बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है. बाढ़ में तीन दर्जन से ज्यादा पुल बह गए हैं. इससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. नेपाल सरकार ने करीब 42 बेली ब्रिज बनाने में दोनों पड़ोसी देशों की मदद मांगी है.
बेली ब्रिज ऐसे अस्थायी पुल होते हैं जिन्हें कम समय में तैयार किया जा सकता है. इन्हें बनाने के लिए भारी मशीनों या बहुत खास उपकरणों की जरूरत नहीं होती. बाढ़ से टूटे रास्तों पर इन पुलों के जरिए यातायात दोबारा शुरू किया जा सकता है.
नेपाल को उम्मीद है कि भारत और चीन की मदद से प्रभावित इलाकों में संपर्क जल्द बहाल होगा. इससे राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में भी मदद मिलेगी.
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नेपाल में राहत और पुनर्वास के लिए भारत ने भी मदद भेजी है. भारत की ओर से राहत सामग्री की दो खेप नेपाल पहुंचाई जा चुकी हैं. इसमें आपदा के बाद जरूरी सामान शामिल है. भारत ने बचाव और राहत अभियान में हर संभव सहयोग देने की बात कही है.
नेपाल सरकार का कहना है कि अभी उसकी पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है. इसके साथ ही टूटे पुलों और सड़कों को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है. सरकार अपने सुरक्षा बलों की क्षमता का इस्तेमाल करते हुए जरूरत के मुताबिक विदेशी मदद भी लेगी.
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