यूरोप में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर शुरू होने वाला है. ब्रिटेन और फ्रांस इस सीजन की पांचवीं हीटवेव की तैयारी कर रहे हैं. मई से ही यूरोप के कई हिस्सों में लगातार तापमान बढ़ रहा है. इसकी वजह से जंगलों में आग, लंबे समय तक सूखा और तापमान के नए रिकॉर्ड देखने को मिले हैं.
फ्रांस की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने मंगलवार से दक्षिण-पूर्वी फ्रांस में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की चेतावनी दी है. वहीं, ब्रिटेन में मंगलवार से इंग्लैंड के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी को लेकर एंबर स्वास्थ्य चेतावनी लागू होगी. इस दौरान तापमान इस हफ्ते 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है.
दुनियाभर में 2026 अब तक तीसरा सबसे गर्म साल रहा है. 2024 और 2025 इससे ज्यादा गर्म रहे हैं. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि साल के अंत तक 2026 सबसे गर्म साल बन सकता है. इसके पीछे इंसानों की वजह से बढ़ रही वैश्विक गर्मी और मजबूत अल नीनो की स्थिति को प्रमुख कारण बताया गया है.
2023 का टूट गया रिकॉर्ड
यूरोपीय क्लाइमेंट एजेंसी कॉपरनिकस के मुताबिक, जुलाई में मौसमी बर्फ से मुक्त समुद्रों की औसत सतह का तापमान अब तक के जुलाई के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा रहा. जुलाई में समुद्र की औसत सतह का तापमान 20.96 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने 2023 के 20.89 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. हालांकि, जुलाई में दुनियाभर में औसत सतही हवा का तापमान 16.90 डिग्री सेल्सियस रहा, जो जुलाई 2024 के साथ संयुक्त रूप से दूसरा सबसे गर्म जुलाई रहा.
औसत तापमान ने तोड़ दिया 2022 का रिकॉर्ड
पश्चिमी यूरोप में जून-जुलाई के दौरान औसत तापमान 21.62 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जिसने 2022 का रिकॉर्ड तोड़ दिया. यूरोपीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र की जलवायु प्रमुख सामंथा बर्गेस ने कहा कि लगातार बने हाई दबाव वाले मौसम सिस्टम ने पश्चिमी यूरोप में गर्मी को रोककर रखा. इससे सूखा भी बढ़ा. मिट्टी सूखने पर प्राकृतिक रूप से ठंडक देने की उसकी क्षमता कम हो जाती है और गर्मी तेजी से बढ़ती है.
5,700 अधिक मौतें हुई थीं
फ्रांस में मई में पहली बार रिकॉर्ड स्तर पर हीटवेव की चेतावनी जारी की गई थी. जून में गर्मी और बढ़ी और सामान्य से 5,700 अधिक मौतें दर्ज की गईं. 23 जून को फ्रांस में अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज हुआ, जब दक्षिण-पश्चिम में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. जुलाई में दो और हीटवेव आईं, जिससे दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में भीषण जंगल की आग लगी और 2.20 लाख लोगों को घर छोड़ना पड़ा. ब्रिटेन में मई और जून की दो रिकॉर्ड गर्मी के दौरान अत्यधिक तापमान से 2,800 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें हुईं.
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