हॉकी इंडिया का DG आरके श्रीवास्तव पर बड़ा एक्शन, छीने सभी अधिकार; 8 आरोपों पर नोटिस – hockey india action against rk srivastava show cause notice eight serious charges ntc ntyv


हॉकी इंडिया ने अपने डायरेक्टर जनरल कमांडर आरके श्रीवास्तव पर कड़ा एक्शन लेते हुए उनके सभी अधिकार तत्काल प्रभाव से छीन लिए हैं.

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने अपने वकील के जरिए भेजे नोटिस में श्रीवास्तव पर भारतीय टीम की जर्सी विवाद समेत आठ गंभीर आरोप लगाए हैं. ये कार्रवाई संगठन में अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए की गई है. नोटिस में उन्हें जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है, जिसके बाद सक्षम प्राधिकारी आगे का फैसला करेगा.

तत्काल प्रभाव से छीने सभी अधिकार

नोटिस में साफ लिखा गया है कि तत्काल प्रभाव से हॉकी इंडिया के डायरेक्टर जनरल के रूप में आपके सभी अधिकार समाप्त हो गए हैं. आप हॉकी इंडिया की ओर से कोई भी अधिकार या कार्य नहीं कर सकते. ये निर्देश अनुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता और सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है. नोटिस में श्रीवास्तव से कहा गया है कि वो सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, डॉक्यूमेंट, फाइलें, एक्सेस क्रेडेंशियल्स और लंबित मामले अध्यक्ष कार्यालय द्वारा नामित अधिकारी को सौंप दें.

सभी फैसलों पर लगाई रोक

उन्हें ऑपरेशनल, एक्जीक्यूटिव, प्रशासनिक, वित्तीय, सुपरवाइजरी, साइन, अप्रूवल, अनुशासनात्मक, मीडिया या प्रतिनिधित्व संबंधी कोई भी अधिकार इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है. साथ ही सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उन्हें बदलने, मिटाने या छुपाने से मना किया गया है. हालांकि, नोटिस में ये भी साफ किया गया है कि ये कोई अंतिम फैसला या सजा नहीं है और उनके मौजूदा अनुबंधित वेतन या सेवा लाभों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

बिना मंजूरी के बदली जर्सी

मुख्य आरोपों में भारतीय नेशनल टीम की जर्सी बदलने का मामला बेहद अहम है. टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को विजिबिलिटी की समस्या बताकर नारंगी रंग में बदल दिया गया था. नोटिस में आरोप लगाया गया कि ये बदलाव अध्यक्ष या कार्यकारी समिति से बिना सलाह के लागू और सार्वजनिक किया गया. बार-बार निर्देश देने के बावजूद इस फैसले से जुड़ा कोई आधिकारिक प्रस्ताव, अनुमोदन या दस्तावेजी आधार पेश नहीं किया गया.

भारत में रहने का था निर्देश, फिर भी गए वर्ल्ड कप

दूसरा बड़ा आरोप नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित विश्व कप के दौरान यात्रा करने को लेकर है. श्रीवास्तव को आगामी हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) सीजन, फ्रेंचाइजी समन्वय और योजना पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भारत में ही रहने का सख्त निर्देश दिया गया था. 30 जुलाई के ईमेल में भी उन्हें रुकने की सलाह दी गई थी. इसके बावजूद उन्होंने यात्रा की, जिसे राष्ट्रपति कार्यालय की सीधी अवज्ञा और अपमान माना गया.

नोटिस में कहा गया कि चयन समिति सदस्य सुभद्रा प्रधान, आयु-वर्ग कोच रानी और सरदार सिंह को विशिष्ट संस्थागत उद्देश्यों के लिए चिन्हित किया गया था. उन्हें वहां नहीं भेजा गया, बल्कि श्रीवास्तव ने खुद को प्राथमिकता देते हुए खुद विश्व कप में भाग लिया. नोटिस में कहा गया कि ये मामले प्रथम दृष्टया कार्यकारी जवाबदेही पर गंभीर और बार-बार उठने वाले सवाल खड़े करते हैं.

अन्य आरोपों में जर्सी विवाद के दौरान 31 जुलाई को पीआर एजेंसी को जारी मीडिया एम्बार्गो और उसके बाद एजेंसी के खिलाफ पूरी कार्रवाई न करने का मुद्दा शामिल है. साथ ही दक्षिण अफ्रीका दौरे पर खिलाड़ी मनप्रीत सिंह, दिलप्रीत सिंह और कृष्ण पाठक से जुड़े दुर्व्यवहार मामले में निर्देशों की अनदेखी का आरोप है. 23 जनवरी के निर्देश को बार-बार दोहराना पड़ा, जबकि श्रीवास्तव कहते रहे कि कार्रवाई हो चुकी है.

वहीं, हेड कोच क्रेग फुल्टन द्वारा मनप्रीत को बाहर किए जाने का विरोध करने और इस्तीफे की धमकी देने की खबरों पर भी उनसे जवाब मांगा गया था. आरोप है कि बार-बार मांगने पर भी फुल्टन से कोई स्पष्टीकरण, पुष्टि, खंडन या एक्शन-टेकन रिपोर्ट नहीं दी गई. इसके अलावा विक्रम पाल मामले में 15 जुलाई से मांगने के बावजूद आईसीसी/पॉश (POSH) रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए.

नोटिस में ये भी आरोप लगाया गया कि एफआईएच (FIH), एएचएफ (AHF) और राष्ट्रीय महासंघों के साथ हुए महत्वपूर्ण पत्राचार और बातचीत को पूरी तरह अध्यक्ष और निर्वाचित संस्था के सामने नहीं रखा गया. श्रीवास्तव को नोटिस मिलने के चार हफ्तों के अंदर जवाब देना होगा, वरना उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी. कोशिशों के बावजूद श्रीवास्तव से संपर्क नहीं हो सका. अब सभी की निगाहें डीजी द्वारा नोटिस पर दिए जाने वाले जवाब और इसके बाद महासंघ द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं.

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