मानसून पर अल नीनो का असर! जुलाई में बारिश करेगी निराश, महंगाई बढ़ना तय – al nino effect on monsoon low rainfall in july 2026 imd weather forecast ntc drmt


देशभर में मानसून की सुस्त रफ्तार लोगों को बेचैन कर रही है. इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को जुलाई के लिए अपना फोरकास्ट जारी किया है. इसके मुताबिक, प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ के लगातार मजबूत होने की वजह से जुलाई के महीने में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है.

मौसम विभाग ने बताया कि जुलाई में होने वाली बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज से 94 फीसदी से भी कम रह सकती है. अगर 1971 से 2020 तक के आंकड़ों को देखें, तो जुलाई के महीने में देश में औसतन 280.4 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके आंकड़े से पीछे रहने का अनुमान है.

भारत पहले ही एक सदी से भी ज्यादा समय में अपने सबसे सूखे जून से जूझ रहा है. जून के महीने में भी सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, जिससे ये साल 1901 के बाद से अब तक का पांचवां सबसे सूखा जून बन गया है.

(Photo- ITGD)

किन राज्यों में कम होगी बारिश?

मौसम विभाग की मानें तो मध्य, पश्चिमी और उत्तरी भारत के बड़े हिस्सों सहित देश के ज्यादातर इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. हालांकि, कुछ क्षेत्रों को इस कमी से राहत मिल सकती है. उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है.

इसके अलावा, पूर्वोत्तर भारत में देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले ज्यादा नमी और बारिश देखने को मिल सकती है.

(Photo- ITGD)

खेती पर मंडराया संकट

मानसून की इस सुस्ती का सबसे बड़ा असर खेती पर दिख रहा है. पिछले हफ्ते जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 23 फीसदी तक घट गई है. मिट्टी में नमी की कमी की वजह से धान, दालें, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की बुआई में भारी गिरावट आई है.

हालांकि, मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने से मानसून की स्थिति में थोड़ा सुधार हो सकता है. इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञान ब्यूरो ने संकेत दिया है कि मानसून के दूसरे भाग यानी अगस्त-सितंबर में ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल’ विकसित हो सकता है, जिससे मानसून को थोड़ी रफ्तार मिल सकती है.

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लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अल नीनो इसी तरह मजबूत होता रहा, तो ये राहत बहुत कम समय के लिए होगी. क्योंकि जुलाई महीने में सीजन की सबसे ज्यादा बारिश होती है, इसलिए इसका सीधा असर देश की खेती पर पड़ेगा जिससे महंगाई बढ़ सकती है. 

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