‘मुझे हटाने में इतनी फुर्ती क्यों?’ शिवसेना यूबीटी पार्षद का आरोप- बदले के तहत हुई कार्रवाई – vishakha raut alleges bias eknath shinde sada sarvankar ntc apdy


मुंबई की पूर्व मेयर और शिवसेना यूबीटी की कॉरपोरेटर विशाखा राउत ने अपनी अयोग्यता पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है. उन्होंने कहा कि बीएमसी में किसी काम को कराने के लिए लगातार अधिकारियों के पीछे भागना पड़ता है, लेकिन उनके मामले में बीएमसी कमिश्नर ने असाधारण तेजी दिखाई. उन्होंने कहा कि पत्र शहरी विकास विभाग को भेजा गया, जिसका नेतृत्व शिवसेना के एकनाथ शिंदे करते हैं.

विशाखा राउत ने कहा, ‘बीएमसी में एक कहावत है- ‘बीएमसी का काम और छह महीने इंतजार’. यहां तक कि जब हम कोई प्रोजेक्ट लागू करना चाहते हैं, तो हमें हर स्तर पर नगर निकाय के अधिकारियों से लगातार फॉलोअप करना पड़ता है. लेकिन मेरे मामले में बीएमसी कमिश्नर ने असाधारण तेजी दिखाई. पत्र शहरी विकास विभाग को भेजा गया, जिसका नेतृत्व शिवसेना के एकनाथ शिंदे करते हैं.’

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि यह पहले से तय था कि ऐसे मामलों वाले यूबीटी शिवसेना के कॉरपोरेटरों को इतनी तेजी से अयोग्य ठहराया जाए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदले की भावना साफ है. साथ ही उन्होंने इसे विपक्ष के दूसरे कॉरपोरेटरों के लिए संदेश बताते हुए कहा कि अगर उनके जैसी वरिष्ठ नेता को अयोग्य ठहराया जा सकता है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है.

सत्तापक्ष पर लगाया आरोप

राउत ने कहा कि सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से उन्हें पहले कभी कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया. हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वह सत्तारूढ़ खेमे में शामिल हो जातीं, तो क्या नतीजा यही होता.

विशाखा राउत ने अपने प्रतिद्वंद्वी सदा सरवणकर के बयान पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सदा सरवणकर पहले बीएमसी आए थे और उन्होंने कहा था कि विशाखा का चुनाव रद्द कर दिया जाएगा. राउत ने पूछा कि उन्हें यह बात पहले से कैसे पता थी. उन्होंने कहा कि इससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या उनका चुनाव रद्द करने का फैसला पहले से तय था.

राउत ने यह भी दावा किया कि इससे पहले किसी ने उनके जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति नहीं उठाई थी. उन्होंने कहा, “किसी ने मेरे जाति प्रमाणपत्र के बारे में कुछ नहीं कहा.” उन्होंने यह भी सवाल किया कि मुंबई की निवासी होने के बावजूद उनके पास पालघर का प्रमाणपत्र कैसे हो सकता है. इस संदर्भ में उन्होंने सदा सरवणकर के प्रमाणपत्र का उदाहरण देते हुए मांग की कि सभी पर नियम समान रूप से लागू किए जाएं.

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बीएमसी प्रमुख अश्विनी भिडे की ओर से राज्य सरकार को भेजे गए उस पत्र को चुनौती देने वाली राउत की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्हें छह साल के लिए अयोग्य घोषित करने वाली गजट अधिसूचना जारी करने को कहा गया था.

बीएमसी की पांचवीं कॉरपोरेटर

शहरी विकास विभाग ने शुक्रवार देर रात राउत को अयोग्य घोषित कर दिया और छह साल तक कॉरपोरेटर रहने पर रोक लगा दी. मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने सोमवार को घोषणा की कि बीएमसी सदन में पूर्व मुंबई मेयर और शिवसेना यूबीटी कॉरपोरेटर विशाखा राउत की सदस्यता 20 अगस्त से स्वतः समाप्त हो गई. विशाखा राउत इस कार्यकाल में अब तक अयोग्य ठहराई जाने वाली बीएमसी की पांचवीं कॉरपोरेटर हैं.

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