बांग्लादेश और भारत के रिश्तों में एक बार फिर से दरार बढ़ती नजर आ रही है. बांग्लादेश की सरकार ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मीडिया से लाइव बात करने की छूट दी गई.
बांग्लादेश सरकार का कहना है कि इस दौरान शेख हसीना और उनके साथियों ने सत्ता और वहां के आम लोगों के खिलाफ बहुत कड़वी और भड़काऊ बातें कहीं. बांग्लादेश का साफ कहना है कि उन्होंने भारत सरकार को पहले ही चेता दिया था कि इस तरह के आयोजनों से दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगेगा. इसके बावजूद इस कार्यक्रम को होने देना निराशाजनक है.
गौरतलब है कि बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होने के ठीक 2 साल आज यानी 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में पत्रकारों को वर्चुअली संबोधित किया. इस दौरान उनका चेहरा नहीं दिखाई दे रहा था. हसीना ने ऑडियो संबोधन में दिसंबर में बांग्लादेश के लौटने के प्लान पर बात की.
शेख हसीना की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस से बांग्लादेश सरकार भड़क गई है. सत्ता पक्ष का कहना है कि जुलाई क्रांति की दूसरी सालगिरह के संवेदनशील दिन पर भारतीय जमीन से शेख हसीना का मीडिया के सामने आना बांग्लादेश के लोगों के लिए बहुत बड़ा अपमान है. वहां की सरकार और आम जनता इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला मान रही है. लोगों का कहना है कि यह आयोजन उन शहीदों की शहादत का अनादर है, जिन्होंने जुलाई क्रांति में अपनी जानें गंवाई थीं.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और इतिहास बदलने की कोशिश
बांग्लादेश सरकार ने अपने बयान में याद दिलाया है कि साल 2024 के जुलाई-अगस्त के महीनों में तख्तापलट के दौरान मासूम बच्चों और आम नागरिकों पर किस तरह जुल्म ढाए गए थे. संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्टों में भी इन बातों की पुष्टि हो चुकी है.
लेकिन, शेख हसीना और उनके करीबी लोग आज तक इन सचाइयों से इनकार कर रहे हैं. बांग्लादेश का मानना है कि यह सब इतिहास को झुठलाने और देश को दोबारा तानाशाही की तरफ धकेलने की एक नाकाम साजिश है, जिसे वहां की जनता कभी कामयाब नहीं होने देगी.
‘देश कभी तानाशाही में नहीं लौटेगा’
बांग्लादेश के लोगों ने यह पक्का इरादा कर लिया है कि उनका देश अब कभी भी पुराने काले दिनों में वापस नहीं जाएगा. सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि बांग्लादेश कभी किसी का गुलाम नहीं बनेगा और देश की राजनीति में अब शेख हसीना या उनके सहयोगियों के लिए कोई जगह नहीं है.
बांग्लादेश का कहना है कि वह भारत के साथ आपसी सम्मान, बराबरी और एक-दूसरे के मामलों में दखल न देने की नीति के तहत अच्छे रिश्ते रखना चाहता है. लेकिन ढाका इस बात से बहुत नाराज है कि साल 2013 के प्रत्यर्पण समझौते के तहत शेख हसीना को वापस भेजने के लिए बार-बार कहने के बावजूद भारत सरकार की तरफ से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है.
बांग्लादेश का मानना है कि भारत की धरती से इस तरह खुलेआम मीडिया में बयानबाजी करने का मौका देना आम जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. दोनों देशों के बीच दोस्ताना रिश्तों के रास्ते में एक बड़ी रुकावट है.
गौरतलब है शेख हसीना की मीडिया से बातचीत से पहले बांग्लादेश सरकार ने भारत सरकार से अपील की थी कि शेख हसीना और उनके साथियों को पब्लिकली मीडिया से बातचीत की इजाजत न दी जाए. इस पर भारत की ओर से जवाब दिया गया है कि प्राइवेट मीडिया बातचीत पर भारत सरकार रोक नहीं लगा सकती है.
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दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना
शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर दिया है. वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि मैंने अपनी वापसी का ऐलान कर दिया है और मैं दिसंबर में वापस जाऊंगी. जाहिर है मैं सही समय पर तारीख का ऐलान करूंगी. पूर्व पीएम ने कहा कि वे लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में यकीन करती हैं. अपनी वापसी से जुड़ी आशंकाओं पर शेख हसीना ने कहा कि बांग्लादेश की सरकार जो चाहे करे, ये उनका काम है, लेकिन उन्होंने तय कर लिया है और वे दिसंबर में बांग्लादेश जाएंगी.
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