‘हम लोग बेईमान हैं… प्रेमानंद महाराज ने क्यों कही ये बात? – premanand maharaj says people are dishonest radha rani naam jap tvisu


वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोअर्स हैं. इसलिए उनकी जुबान से निकला एक-एक शब्द सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलता है. प्रेमानंद महाराज अपने हर भक्त से एक ही बात कहते हैं कि नामजप करने से ही उद्धार होगा. प्रेमानंद महाराज के दरबार में अर्जी लगाने आए एक भक्त ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप तो बाबाजी हैं. इसलिए आप नामजप कर सकते हैं. लेकिन हमारे लिए यह संभव नहीं है. आइए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने इस पर क्या कहा.

दरबार में आए शख्स ने प्रेमानंद महाराज के सेवकों के माध्यम से कहा- ‘आप तो बाबाजी हैं. आपके पास भजन के लिए पूरा समय है. लेकिन हमारा परिवार है. दायित्व हैं, जिम्मेदारियां हैं. तो हम कैसे नियमित नामजप कर सकते हैं.’ इतना सुनकर प्रेमानंद महाराज बोले- ‘अच्छा, हमें ये बताओ सिर्फ राधा-राधा कहने या जपने में आपको क्या परेशानी होगी.’ प्रेमानंद महाराज ने जोर देते हुए कहा, ‘हम लोग बेइमान हैं. भजन के लिए कहते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं है. और खाली बैठकर सिर्फ मोबाइल चलाते रहते हैं. यह सब बेईमानी है हमारी.’

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा, ’12 घंटे कौन काम करता है? कोई बहुत व्यस्त होगा तो ज्यादा से ज्यादा 12 घंटे ही काम करता होगा. नहीं तो ज्यादातर 8 घंटे ही काम करते हैं. हम 12 घंटे काम, 6 घंटे सोना, 2 घंटे भोजन और 1 घंटा मनोरंजन के लिए निकाल दें, फिर भी 24 घंटे में से 3 घंटे शेष बचते हैं. अब तुम 3 घंटे भजन करके दिखाओ. यदि तुम 3 घंटे भजन कर लोगे तो त्रिलोक के नाथ को प्रसन्न कर लोगे.’

प्रेमानंद महाराज ने फिर से दोहराते हुए कहा कि भजन के नाम पर हम लोग बेइमान हैं. देखो, जिसने किया उसने ही पाया. आलसी और बेइमानों को कभी उन्नति प्राप्त नहीं होती है. इसलिए जब लोग कहते हैं कि वो गृहस्थ हैं, इसलिए नामजप नहीं कर सकते तो वो बेइमानी करते हैं.

प्रेमानंद महाराज के सेवादार ने संबंधित भक्त की प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘महाराज जी, कुछ और करवा लो. लेकिन नामजप करना बहुत कठिन लगता है.’ इसके जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा, ‘दवा के बिना रोग भला कैसे ठीक होगा. भगवान की नाम शक्ति ही इंसान की इच्छाओं को पूर्ण कर सकती है. राम नाम के जप से मिला फल लोक-परलोक में भी काम आएगा. जब तक भगवान का नाम नहीं लोगे, दुखों से पीछा नहीं छुड़ा पाओगे. सुख की प्राप्ति नहीं होगी.’

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