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DUSU: हॉस्टल की घोषणा को NSUI ने बताया दांव, ABVP बोली-हादसे पर रील बनाने वाले परेशान – DUSU election ABVP NSUI hostel issue delhi govt rekha gupta edmm


दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए वोटिंग में महज दो दिन का वक्त बचा है, लेकिन उससे ठीक पहले दिल्ली सरकार के एक बड़े ऐलान ने कैंपस की सियासत में उबाल ला दिया है. दिल्ली सरकार द्वारा 10,000 छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की घोषणा के बाद नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) आमने-सामने आ गए हैं.

छात्रों के लिए सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल का मुद्दा, जो अब तक चुनावी घोषणापत्रों तक सीमित था, वोटिंग से 48 घंटे पहले सीधा राजनीतिक घमासान बन चुका है.

NSUI का हमला

‘जब सत्या निकेतन में हादसा हुआ तब सरकार कहां थी, अब चुनाव देखकर याद आई?’ NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस घोषणा की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि छात्र लंबे समय से सुरक्षित और किफायती आवास के लिए भटक रहे हैं, लेकिन सरकार को चुनाव से ठीक दो दिन पहले ही इसकी याद क्यों आई?

NSUI ने सरकार से पूछे सीधे सवाल

ये 10,000 बेड्स कहां बनाए जाएंगे और निर्माण कब पूरा होगा?
इस प्रोजेक्ट का कुल बजट क्या है और छात्रों के लिए फीस स्ट्रक्चर क्या रखा जाएगा?
हॉस्टल आवंटन (Allotment) की प्रक्रिया और नियम क्या होंगे?

जाखड़ ने स्पष्ट किया कि उनकी संस्था हॉस्टल बनने का विरोध नहीं कर रही है, लेकिन सत्या निकेतन हादसे के बाद भी चुप रहने वाली सरकार का चुनाव से ठीक पहले यह ऐलान करना सिर्फ वोट बैंक की राजनीति की तरफ इशारा करता है.

ABVP का तीखा पलटवार: ‘NSUI को समाधान चाहिए या सिर्फ राजनीति?’

NSUI के सवालों पर पलटवार करते हुए ABVP के दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कांग्रेस और NSUI पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया. शर्मा ने कहा कि जो छात्र संगठन कल तक हॉस्टल की कमी का रोना रो रहा था, आज जब 10,000 बेड्स की व्यवस्था की जा रही है, तो वही इसका विरोध करने पर उतर आया है.

ABVP ने द‍िया जवाब

‘हादसे पर रील्स बनाने वाली राजनीति’ का तर्क देते हुए सार्थक शर्मा ने कहा कि सत्या निकेतन हादसे के वक्त मलबे पर हथौड़ा चलाकर रील्स बनाने से लेकर 10 हजार हॉस्टलों के ऐलान पर सवाल उठाने तक कांग्रेस और NSUI ने सिर्फ छात्रों के मुद्दों पर राजनीति की है. ABVP ने सवाल उठाया कि दिल्ली में दशकों तक कांग्रेस की सरकार रही, तब उन्होंने छात्रों के हॉस्टल विस्तार के लिए क्या ठोस कदम उठाए थे?

चुनावी मोड़ पर हॉस्टल की रार
बता दें कि डीयू के आम छात्रों के लिए हॉस्टल और पीजी (PG) का भारी किराया हमेशा से सबसे बड़ी समस्या रही है. चुनाव से ठीक दो दिन पहले 10,000 हॉस्टल बेड्स के इस सरकारी ऐलान ने निश्चित रूप से चुनावी समीकरणों को गरमा दिया है. एक तरफ जहां NSUI इसे ‘चुनावी जुमला’ और पारदर्शिता की कमी बताकर घेर रही है, वहीं ABVP इसे छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग की जीत के रूप में भुनाने में जुटी है.

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