राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए एजी पेरारिवलन के लिए अब नई शुरुआत तमिलनाडु की अदालतों में हो रही है. 2022 में सजा में छूट मिलने के बाद रिहा हुए पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई की, इसके बाद 2025 में ऑल इंडिया बार एग्जाम पास किया और अब वकील बन गया.
जिस कानूनी व्यवस्था में पेरारिवलन ने आरोपी और दोषी के रूप में अपने जीवन के 31 साल बिताए, अब वही मद्रास हाई कोर्ट में वकील के रूप में काम करने जा रहा है. इस समय उसकी उम्र 54 वर्ष है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पेरारिवलन ने बताया कि “मेरा ध्यान उन कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने पर होगा, जिन्हें अक्सर प्रभावी प्रतिनिधित्व तक पहुंच नहीं मिल पाती है.”
मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी पेरारिवलन के नामांकन समारोह में उपस्थित थे. तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के अध्यक्ष पी.एस. अमलराज और उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरन भी समारोह में शामिल हुए. अधिवक्ता सी.के. चंद्रशेखर ने नामांकन प्रस्ताव पेश किया, जबकि नामांकन समिति के अध्यक्ष के. बालू ने शपथ दिलाई.
31 साल जेल में रहा पेरारिवलन
पेरारिवलन को 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, उस समय उसकी उम्र महज 19 वर्ष थी. यह हत्या आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) द्वारा की गई थी.
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने पेरारिवलन को हिरासत में रखा और उसकी मां को भी उससे मिलने नहीं दिया.
पेरारिवलन पर आरोप था कि उसने नौ वोल्ट की बैटरी खरीदी और सप्लाई की थी, जिसका इस्तेमाल राजीव गांधी की हत्या करने वाले बम विस्फोट में किया गया था. इस आरोप के सबूत के तौर पर एक दुकानदार ने गवाही दी थी कि पेरारिवलन ने बैटरी उसकी दुकान से खरीदी थी. यह मामला टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (TADA) के तहत दर्ज किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2022 को अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया, जिसने हत्या के मामले में 31 साल जेल में बिताए थे.
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