अमरीका और ईरान के बीच में चालीस दिनों की संघर्ष के बाद सीजफायर और शांति को लेकर प्रक्रिया तो शुरू हुई लेकिन युद्ध विराम के MoU पर साइन करने के बावजूद पिछले एक महीनों में इन दोनों मुल्क ने एक नहीं कई बार अपनी इस MoU का उल्लंघन कर दिया है.
भले ही इन दोनों मुल्कों के बीच लड़ाई कई बार हो चुकी हो, लेकिन हर बार की लड़ाई में ईरान का पलड़ा भारी नजर आया. अमेरिका की साख पर कई बार सवाल खड़े हुए। ऐसे में इन तमाम दावों और युद्ध के बीच मैंने तीन बार ईरान का दौरा किया.
मैं अकेला ऐसा भारतीय पत्रकार हूं, जो इस जंग के माहौल में ईरान तीन बार जा चुका हूं. और शायद दुनिया के चुनिदा पत्रकारो में से भी एक हूं.
कितना बदल गया ईरान में हवाओं का रुख?
मेरा पहला दौरा युद्ध से महज कुछ दिन पहले हुआ था, जब ईरान की सेना युद्ध की तैयारियां कर रही थी. इस दौरान मैंने ईरान के कई इलाकों में रिपोर्टिंग की, जिसमें तेहरान, इशफहान, नतनज, कुम्ब और कई महत्वपूर्ण इलाके शामिल थे. इस दौरान मैंने ईरान की युद्ध से पहले की तैयारी, ईरान की सैन्य क्षमता और सुप्रीम लीडर की ताकतों पर सवाल खड़े होने के दौरान हुए ताजा प्रदर्शन की रिपोर्टिंग भी की. इसके बाद जंग के दौरान मैंने एक बहुत छोटा सा दौरा किया. हालांकि, इस दौरान मुझे कुछ ज्यादा जगहों पर जाने या रिपोर्टिंग करने का मौका नहीं मिला.
हाल ही में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनेई के अंतिम संस्कार और सुपुर्द-ए-खाक किए जाने की प्रक्रिया के दौरान मुझे एक बार फिर से ईरान जाने का मौका मिला. ये दौरान बहुत अहम था क्योंकि इस बार ईरान में बहुत बड़ा आयोजन था. इतिहास में इतना बड़ा आयोजन अब तक कभी नहीं किया गया था. दो करोड़ लोगों के जुटने की तैयारी थी. मेरा सफर शुरू हुआ ईरान की राजधानी तेहरान से जहां मैं 2 जुलाई को पहुंचा. इसके बाद, मैंने वहीं से अपनी रिपोर्ट शुरू कर दी.
रिपोर्टिंग के दौरान मैंने वहां पर करोड़ों लोगों को सड़को पर देखा. कोई रो रहा था, कोई परेशान था, कोई दर्द में था. हर शख्स के गम के पीछे एक ही वजह थी, उनके सुप्रीम लीडर को मार दिया गया. सुप्रीम लीडर का मारा जाना वहां के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा गम था, लेकिन 125 दिनों के बाद अब उनको सुपुर्द-ए-ख़ाक किए जाने की प्रक्रिया चल रही थी. अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही थी. सड़कों पर लोग इकट्ठा हो रहे थे. हर तरफ सिर्फ काले लिबास में लोग नजर आ रहे थे. क्या पुरुष, क्या महिलाएं, क्या बच्चे… हर वर्ग, हर उम्र के लोग सड़को पर थे. यहां तक कि दुनिया भर के तमाम देशों से भी शिया समुदाय के लोग ईरान पहुंचे थे.
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पूर्व सुप्रीम लीडर के शव को ग्रैंड मुसल्ला में रखा गया था, जहां से मैंने कई रिपोर्ट्स की. हमें स्पेशल पास दिया गया था. हमने वाहन रिपोर्टिंग की, लोगों से बातचीत की. उन तस्वीरों को आपने कैमरे में क़ैद किया और उसके बाद उन्हें पूरी दुनिया ने देखा. मेरे लिए सबसे ज्यादा अहम था कि मैं उस जगह गया, जो कभी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनेई का घर हुआ करता था और उसी घर में सुप्रीम लीडर को 28 फरवरी को मारा गया था.
खामेनेई के आवास का पूरा कंपाउंड अब एक खंडहर में तब्दील हो गया है. इस इलाके में आस-पास की सारी इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा है. मैं उस गांधी हॉस्पिटल भी गया, जिसे जंग के दौरान टारगेट किया गया था. वो हॉस्पिटल भी बर्बाद हो चुका है. ईरान दौरे के वक्त मैंने देश के कई टॉप अधिकारियों से बातचीत की, जिन्होंने यह बताया कि अब ईरान स्टेट ऑफ फॉर्म को फिर से पहले की तरह नहीं होने देगा नहीं.
इस बार का दौरा बहुत अहम था क्योंकि इससे मुझे जंग से पहले, जंग के दौरान और शांति प्रक्रिया के दौरान वाले ईरान को जानने का मौका मिला. इस बार का ईरान बदला हुआ है, ज्यादा मजबूत दिखा. पूरा ईरान नई और बड़ी जंगी तैयारी में जुटा हुआ नजर आया.
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