ईरान की मिसाइलों से बचाने के लिए इजरायल ने UAE को दिया था आयरन डोम, पहली बार किसी दूसरे देश को दिया मिसाइल डिफेंस सिस्टम – Israel UAE Iron Dome in america iran war


ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच शुरू हुए युद्ध में इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की मदद के लिए अपना प्रसिद्ध आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम भेज दिया. साथ ही सिस्टम चलाने के लिए इजरायली सैनिक भी UAE भेजे गए. यह इजरायल द्वारा किसी दूसरे देश को आयरन डोम भेजने का पहला मौका था. UAE ने इस सिस्टम का इस्तेमाल करके दर्जनों ईरानी मिसाइलों को रोक लिया.

ईरान युद्ध शुरू होते ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात की. इसके तुरंत बाद नेतन्याहू ने सेना को आदेश दिया कि यूएई को एक आयरन डोम बैटरी, मिसाइलें (इंटरसेप्टर्स) और कई दर्जन ऑपरेटर्स भेजे जाएं. 

यह भी पढ़ें: रूस से चौथा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत आ रहा, पश्चिमी सीमा पर तैनात होगा

यूएई में तैनात इस आयरन डोम सिस्टम ने ईरान की तरफ से दागी गई दर्जनों मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर दिया. इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी ईरान में मौजूद छोटी दूरी की मिसाइलों पर भी हमले किए, ताकि वे UAE और अन्य खाड़ी देशों पर हमला न कर सकें.

Israel UAE Iron Dome

UAE का रुख

UAE के अधिकारियों ने इजरायल की इस मदद को बहुत सराहा है. यूएई के एक अधिकारी ने कहा हम इसे कभी नहीं भूलेंगे. यह हमारे लिए आंखें खोलने वाला पल था. हमें पता चला कि हमारे असली दोस्त कौन हैं. UAE के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल अधिकारी तारेक अल-ओतैबा ने लिखा कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान UAE को सैन्य मदद, खुफिया जानकारी और कूटनीतिक समर्थन देकर सच्चे सहयोगी साबित किए हैं.

यह भी पढ़ें: सीजफायर के बावजूद हिज्बुल्लाह पर क्यों टूट पड़ा इजरायल, क्या ईरान से बातचीत फिर पटरी से उतरेगी?

ईरान की नाराजगी और मुआवजे की मांग

ईरान इस पूरे मामले से बेहद नाराज है. ईरान का आरोप है कि UAE, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और जॉर्डन ने अमेरिका और इजरायल को अपने हवाई अड्डे दिए और युद्ध में सीधे शामिल हुए. अप्रैल 2026 के मध्य में ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत ने एक पत्र लिखकर इन पांच अरब देशों से मुआवजा मांगा है.

Israel UAE Iron Dome

ईरान का कहना है कि इन देशों ने अपने क्षेत्र का इस्तेमाल करके ईरान पर हमले कराए, इसलिए उन्हें युद्ध से हुए भौतिक और नैतिक नुकसान का मुआवजा देना चाहिए. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों (Gulf States) ने ईरान के खिलाफ अपना रुख काफी सख्त कर लिया था.

UAE और सऊदी अरब ने अमेरिकी जेट्स को अपने एयर बेस इस्तेमाल करने दिए थे. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि वे युद्ध में सीधे शामिल होने पर भी विचार कर रहे थे. ईरान के साथ युद्ध के दौरान इजरायल और UAE के बीच सैन्य सहयोग एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है. 

—- समाप्त —-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *